3 साल तक कमान संभालने के लिए जे०पी० नड्डा बने बीजेपी के 11वें अध्यक्ष

नई दिल्ली : जे०पी० नड्डा बने बीजेपी के 11वें अध्यक्ष , अब देखना यह होगा कि क्या अमित शाह की तरह जेपी नड्डा भी बन पाएंगे बीजेपी के नए चाणक्य।

जेपी नड्डा की ताजपोशी के लिए बीजेपी दफ्तर में भव्य समारोह रखा गया और इस पूरे समारोह में अमित शाह JP Nadda के बेहद करीब रहे।

नड्डा को अपनी कुर्सी सौंपते हुए शाह के चेहरे पर खुशी बिल्कुल साफ नजर आ रही थी , नड्डा को अमित शाह द्वारा पटका पहनाया गया और फिर मिठाई खिलाई गई।

मिठाई खिलाने के बाद खुद अमित शाह ने कुर्सी को आगे खिसकाया और जेपी नड्डा को उस पर बैठने के लिए आमंत्रित किया।

कुर्सी पर बैठने के बाद जब अमित शाह ने नड्डा को एक सामान्य बीजेपी के कार्यकर्ता होने के नाते जब परिणाम किया तो जेपी नड्डा उनके अभिवादन के तौर पर खड़े हो गए और झुक कर उनका सम्मान किया।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही जेपी नड्डा बोले कि जहां अब तक कमल नहीं खिला है वहां कमल को खिलाने का काम किया जाएगा।

इसके बाद अमित शाह चुपचाप दफ्तर से बाहर निकल गए जहां पर बैठकर उन्होंने बीजेपी को एक नया मुकाम दिलाया।

अमित शाह के अभिवादन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित तमाम बड़े नेताओं ने उनका अभिवादन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी नड्डा की कामयाबी का नाम आएगा तो अमित शाह का नाम तो आएगा ही आएगा।

बीजेपी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के लिए आने वाले इम्तिहान

जेपी नड्डा का पहला इम्तिहान दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 होगा , अमित शाह के कार्यकाल में बीजेपी को पहली हार 2015 में दिल्ली में मिली थी, अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि जेपी नड्डा अपने पहले इम्तिहान यानी दिल्ली जीत पाते हैं या नहीं।

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2015 में बिहार चुनाव के अंदर भी बीजेपी को हार मिली थी और इस बार 2020 में होने वाले बिहार चुनाव में सरकार बनवाना जेपी नड्डा की दूसरी चुनौती रहेगी।

2016 में असम में पहली बार अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी थी और अब 2021 के अंदर होने वाले असम विधानसभा चुनाव के अंदर सरकार बचाना जेपी नड्डा की तीसरी बड़ी चुनौती रहेगी , एनआरसी लागू होने के बाद असम में बीजेपी का विरोध चल रहा है तो यह एक कठिन भरी चुनौती साबित होगी।

वर्ष 2016 के अंदर केरल, पुडुचेरी ,तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी अमित शाह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को हार कर सामना करना पड़ा था और अब 2021 में होने वाले केरल ,तमिलनाडु ,पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के अंदर पार्टी को मजबूत करना जेपी नड्डा की चौथी चुनौती रहेगी।

केरल ,पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जहां पर भारतीय जनता पार्टी कभी भी अपनी सरकार नहीं बना पाई है तो पहली बार इन राज्यों में कमल खिलाकर खुद को साबित करना नड्डा की प्रमुख चुनौती रहेगी।

अमित शाह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के अंदर 2017 विधानसभा चुनाव में बंपर जीत मिली थी तो अब जेपी नड्डा के लिए यह चुनौती बहुत ही अहम रहेगी कि यूपी के अंदर 2017 जैसी चुनावी जीत को उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में कायम रख सके।

2017 के अंदर शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने पंजाब को गंवा दिया था तो अब पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनवाना जेपी नड्डा के लिए छठी चुनौती रहेगी।

एक नजर बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह की कामयाबी पर

आज खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह की कामयाबी को अपने लफ्जों में बयान किया , और शाह की कामयाबी बड़े गर्व से सुनाई।

अमित शाह की बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए सबसे बड़ी कामयाबी है कि 5 साल के अंदर उन्होंने 16 राज्यों में बीजेपी को जीत दिलाई।

इन 16 राज्यों में शामिल महाराष्ट्र ,असम ,हरियाणा ,त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में पहली बार बीजेपी ने अपना कमल खिलाया था।

यह 16 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी का झंडा लहराना कोई छोटी बात नहीं है, यह खुद भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।

2019 में 303 सीटें जिता कर केंद्र में दूसरी बार बीजेपी की सरकार बनवाने में शाह का बड़ा योगदान रहा है।

हालांकि बीजेपी की नींव आडवाणी जी ,अटल बिहारी वाजपई जी , आदि बड़े नेताओं ने रखी थी लेकिन उस नींव के ऊपर एक मजबूत मकान अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने स्थापित किया है।

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