कोरोना की मार जीवन का सार – कविता

Best Hindi Poem on corona

इतिहास के पन्नों मे कुछ उलट फेर हो रही है…
वक़्त करवट ले रहा है, एक नई भोर हो रही है…
दौड़ती थी जिंदगी जिस रोटी के नाम…
सुना है उस रोटी मे भी आजकल देर अबेर हो रही है…
इतिहास के….

गुनाह किसका है, सजा किसे मिली…
किसे जिंदगी, किसको मौत मिली…
किस से जाकर मै ये सवाल करू -2
किस के आगे मै बवाल करू…
अखिल विश्व को corona ने घेरा…
हर घर मे सहमी जान मिली…
गुनाह किसका….

चलो पहलु दूसरा देखते है…
गंगा पवित्र हो गई…
दूर से हिमालय को देखते है…
सड़को पर भीड़ कम है…
माँ का आँचल भरा भरा है…
जो नहीं बोलते थे बाप से बेटे…
जो माँ से आँख चुराते थे…
साथ बैठ कर खाना खा रहे है…
बचपन के किस्से सुना रहे है..
सुना है रामायण नहीं देखी जिसने…
आज बाप को पिताश्री बुला रहे है…
बचपन की….

गलती किसकी भी हो..
प्रकृति बदला लेती है..
जो खुद को भगवान समझ बैठे थे …
जो खुद को कायनात समझ बैठे थे ..
औकात दिखा दी पल भर मे…
हकीकत बता दी पल भर मे…

तुम मेहमान मात्र हो संसार मे…
सचाई बता दी पल भर मे…..

Hindi Poem on corona virus by sonu suthar

सोनू सुथार
खिनानियाँ – नोहर (राजस्थान)

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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