कई झड़पों के बाद लाल किले पर किसानों ने फहराया झंड़ा, जानिए क्यों मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

किसानों ने फहराया झंड़ा
किसानों ने फहराया झंड़ा

किसानों ने फहराया झंड़ा: पिछले 2 महीनों से लगातार कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों की बात जब केंद्र सरकार ने नहीं मानी तो उन्होंने 72वें गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकालकर देश की राजधानी दिल्ली के अंदर गणतंत्र दिवस मनाने का मन बनाया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें काफी रोकने का हर संभव प्रयास किया, जिसके बाद लाल किले पर मन बनाकर किसानों ने फहराया झंडा, पुलिस ने लाल किले से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए उन पर लाठीचार्ज किया, जिससे किसान गुस्से में आ गए और उन्होंने किले के अंदर जाकर झंडा फहराया, इस दौरान लाल किले के अंदर करीब 45 मिनट तक किसानों का जमावड़ा लगा रहा।

अगर केंद्र सरकार ने एक कदम पीछे ले लिया होता, तो आज राजधानी में गणतंत्र दिवस का आंदोलन और किसानों का आक्रोश एक ही समय में नहीं दिखता। केंद्र सरकार की नोटबंदी, जीएसटी ने देश के आम आदमी के मन में नाराजगी पैदा कर दी है। यह समझा जाना चाहिए कि रूस जैसे मजबूत देश के लोगों ने भी वहां के शासन के खिलाफ विरोध करने के लिए मास्को की सड़कों पर कदम उठाए। आज हमारे देश की राजधानी में किसान सड़कों पर उतर गए हैं। किसान उसका समर्थन करने के लिए राज्य की राजधानियों में भी मार्च कर रहे हैं। यह चित्र अच्छा नहीं है। बीमारी कल और फैल सकती है। क्या यह वास्तव में एक गणतंत्र है?

इस तरह किसानों ने फहराया झंड़ा

किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में लाल किले के प्राचीर पर प्रदर्शन करते हुए किसानों ने अपना झंडा फहराया, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आने के बाद आप सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर स्वत: संज्ञान लेने की मांग उठाई गई है, मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए इस पत्र में दर्शाया गया है कि लाल किले की प्राचीर पर प्रदर्शनकारियों द्वारा दूसरा झंडा राष्ट्रीय झंडे का अपमान है, इसके साथ ही इस पत्र में लाल किले पर दूसरा झंडा फहराने वाले प्रदर्शनकारी किसानों पर कार्रवाई की मांग की गई है, यह मांग कानून के छात्र आशीष राय ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर की है।

बताते चलें कि देश की राजधानी में गणतंत्र दिवस पर किसानों के आंदोलन के चलते सड़कों पर अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले हैं, इनमें से सबसे अभूतपूर्व जरा से लाल किले पर देखने को मिला है जहां पर प्रदर्शनकारियों ने ध्वज स्थान पर चढ़कर वहां पर दूसरा झंडा लगाया, जहां पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तिरंगा फहराया जाता है

आपको बता दें कि प्रदर्शनकारी किसान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने को लेकर लाल किला गए जो कि स्वतंत्रता दिवस समारोह का मुख्य स्थल है, किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान आसपास के क्षेत्रों में कई झड़पें भी हुई, इस दौरान ट्रैक्टर परेड में घायल होने वाले किसानों की वास्तविक संख्या की जानकारी नहीं मिल सकी है, लेकिन दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने 86 कर्मियों को घायल बताया है, जिनमें से 41 पुलिसकर्मी लाल किले पर घायल हुए हैं।

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