कार्टोसेट-3 को किया सफल लांच. भारत की अंतरिक्ष में होगी आंख.

कभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने आज सुबह 9:28 पर अपना एक और उपग्रह लांच किया है। जिसका नाम  कार्टोसेट-3 रखा गया। इस उपग्रह को भारत की अंतरिक्ष में आंख के नाम से जाना जाएगाा।

कार्टोसेट-3 

आसमान के अंदर भारत की आंख कहलाने वाला यह उपकरण की सीरीज का नवीनतम तीसरा उपग्रह है।

इसलिए इसका नाम कार्टोसेट-3 रखा गया है। आज इस उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर दिया गया है।

भारत अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने बुधवार को सुबह 9:28 पर कार्टोसेट-3 को लांच किया।

इसके लिए इसरो चीफ के.शिवन श्रीहरिकोटा मिशन कंट्रोल कंपलेक्स में मौजूद रहे। उनके साथ मिशन के इंजीनियर और इसरो के टॉप साइंटिस्ट मौजूद थे।

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इसरो के इस मिशन की यह 10 महत्वपूर्ण विशेषताएं

  • कार्टोसेट-3 कार्टोसेट सीरीज का सबसे बेहद चुस्त और उन्नत ऊपर है। जिसे high-resolution तस्वीर लेने की क्षमता भी है।
  • इस उपग्रह का कैमरा इतना ताकतवर है। कि;  वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकता है।
  • कार्टोसेट-3 सेटेलाइट सेना के लिए बेहद मददगार साबित होता है।
  • हाल ही में पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल स्ट्राइक के लिए का कार्टोसेट-3 उपग्रह की मदद ली गई है।
  • कार्टोसेट-3 को अंतरिक्ष में 509 किलोमीटर दूर 9.5 डिग्री के झुकाव के साथ कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
  • इस उपग्रह का भार 1625 किलोग्राम है। किसी भी आपदा के वक्त यह राहत और बचाव में मदद कर सकता है।
  • कार्टोसेट-3 बड़े पैमाने पर शहरी नियोजन,
  • ग्रामीण संस्थान एवं बुनियादी ढांचे के विकास तटीय भूमि के उपयोग तथा भूमि कवर करने के लिए उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करेगा।
  • इसका जीवनकाल 5 साल तक का होगा यह उपग्रह कार्टोसेट सीरीज का नौवां उपग्रह है।
  • PSLV-C47 कार्टोसैट-3 के साथ अमेरिका के वाणिज्यिक उद्देश्य वाले 13 छोटे उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष में गया।
  • यह उपग्रह पहले 25 नवंबर को लांच होना था लेकिन बाद में इसकी तारीख बदलकर 27 नवंबर कर दी गई।
  • इसरो प्रमुख के. शिवन ने देश के इमेजिंग उपग्रह कार्टोसैट -3 की सफलता के लिए मंगलवार सुबह यहां भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना की।