क्या यही अंजाम होना था.. – Hindi Kavita, Best Poem in Hindi

Hindi Kavita : आज के इस आधुनिक युग में दुनिया ने जो मार्ग चुन रखा है ,लोगों के जीवन जीने की शैली और उनकी मानसिकता में जो बदलाव आये है, भारत देश को विकास और उन्नति की राह पर ले जाने के लिए देश के वैज्ञानिको, और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुतियाँ दी थी, आद्यात्मिक गुरुओं ने समाज में आपसी भाई चारे और शान्ति कायम करने के लिए जो उपदेश दिए थे . आज उन सब को दरकिनार करते हुए हम हमारा समाज किस और जा रहा है..क्या यही अंजाम होना था.. कविता वर्तमान समय में देश में चल रही मानसिकता पर प्रहार करती है.. यह कविता आपको आज के समाज की वास्तविक परिस्थितियों का आभास करवाती नजर आएगी।

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क्या यही अंजाम होना था- हिन्दी कविता

विश्व गुरु हिंदुस्तान का…
भरत की संतान का…
कलाम के विज्ञानं का..
बाबा के सविधान का…

क्या यही अंजाम होना था…
गाँधी की कुर्बानी का…
झाँसी की रानी का…
भगत सिंह बलिदानी का…
वीरों की कहानी का…

क्या यही अंजाम होना था…

उदम सिंह सरदार का…
बिस्मिल्लाह ओर उनके यार का…
माटी के हर एक दिलदार का…
महाराणा के वार का…

क्या यही अंजाम होना था….
गीता ओर कुरान का…
वेद ओर पुराण का…
पूजा ओर अजान का…
भक्ति ओर ज्ञान का…

यही अंजाम होना था….

क्या यही अंजाम होना था,
इस भीड़ वाले हिंदुस्तान का…
इस प्यारे वतन महान का…
लोग घरों मे सहमे रहे…
बाजारों मे सनाटे जमे रहे…
किसान की फसले कटे ओर
कर्जे से हाथ सने  रहे…
क्या यही अंजाम होना था… 
इस भीड़ वाले….

गलत है पर कहूंगा…

देशभक्ति कम भीड़ ज़्यदा है…
धर्म के नाम पर लड़ पड़े
ऐसे फ़क़ीर ज़्यदा है…
जाती के नाम पर काट लेते है गले जंहा…
ऐसे मरे हुये जमीर ज़्यदा है…

किसी को हिन्दू अच्छा लगता है…
कोई कुरान का बच्चा लगता है…
इंसानियत मरी मरी सी है…
दया धर्म सहम रहे….
कोई डॉक्टर पर थूक रहा है…
कोई पुलिस पर पत्थर फेंक रहे….

समझ नहीं आता ये नादान किस से उलझ रहे…
किस से भाग रहे किस  से पलट रहे…. 
फरिस्ते है जो जिंदगी के…
सच्चे है जो बंदगी के…
मौत को जिंदगी मे बदलने आये है…
झूज रहे है जो बीमारी से उसे बचाने आये है…
इनके बाप का कुछ नहीं जाता…
ये तुम्हे अपनाने आये है…
इज्जत करो इनकी, दिल से सलाम करो…
ये धर्म नहीं जिंदगी संजोने  आये है….
ये तुम को दया दिखाने आये है…
ये तुमको असली धर्म बताने आये है…

क्या यही अंजाम था…..

रचनाकार : सोनू सुथार
खिनानियाँ – नोहर (राजस्थान)

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