केदारनाथ को क्यों कहते हैं “जागृत महादेव” आइये जाने..

केदारनाथ धाम जागृत महादेव : वैश्विक महामारी कोरोना के चलते इस बार भक्त और भगवान के बीच बनी दूरी को ऑनलाइन पूजा के जरिए कम किया जा रहा है। जी हाँ केदारनाथ धाम में 29 अप्रैल 2020 को कपाटोद्घाटन के बाद से देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं द्वारा बाबा केदार नाथ के इस बार ऑनलाइन दर्शन ही किये जा रहें है । धाम में प्रतिदिन देश के विभिन्न प्रांतों से दो से तीन श्रद्धालुओं द्वारा बाबा केदार की सुबह की पूजा, आरती व सायंकालीन आरती ऑनलाइन कराई जा रही हैं।

केदारनाथ धाम जागृत महादेव की कहानी

Let’s get read full story, Why do you call Kedarnath “jagrat mahadev” दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी आपके

“एक बार एक शिव-भक्त (shiva devotees) अपने गांव से kedarnath धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ नहीं हुआ करती थी इसलिए शिव भगत पैदल ही चल पड़ा। रास्ते में उसे जो भी व्यक्ति मिलता उससे केदारनाथ का मार्ग पूछ कर आगे बढ़ता रहा। मन में भगवान शिव का ध्यान करते चलते-चलते उसे महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह शिव के धाम यानि केदारनाथ धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है।

वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। उसने पंडित जी प्रार्थना करते हुए कहा की वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके यहाँ तक आया है – कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये।
लेकिन वहां का तो नियम है की एक बार मन्दिर के कपाट बंद तो बंद हो गये तो वो 6 महीनों के बाद ही वापस खुलेंगे। और नियम तो नियम ही होता है। वह बहुत रोया-गीडगीडाया और बार-बार भगवान शिव को याद करते हुए कह रहा था की बस एक बार प्रभु के दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी उसकी नही सुनी।

एक पंडित जी उनके पास आये और बोले की उसे दर्शन करने के लिए अब 6 महीने बाद आना होगा , क्योकि 6 महीने बाद मन्दिर के दरवाजे खुलेंगे। अब अगले 6 महीनों तक यहाँ बर्फ और ठंड पड़ेगी , ऐसा कहने के बाद सभी वहां से चले गये परन्तुं वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे अपने शिव पर विश्वास था की वो जरुर उस पर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। तभी उसके कानों में किसी के आने की आहट सुनाई पड़ी । उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसे एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आते दिखाई पड़े।

वह सन्यासी बाबा उस के पास आये और पूछा की – बेटा कहाँ से आये हो ? उसने अपनी आपबीती उस सन्यासी बाबा को सुनाई और कहा की मेरा यहाँ आना व्यर्थ हो गया। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।

बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है, अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला – कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये।

पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा – तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। और अबकी बार  6 महीने होते ही सबसे पहले वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा – नही, मैं कहीं नहीं गया और आप कल ही तो मिले थे, रात को मैं यहीं सो गया था, मैं कहीं नहीं गया।

उसकी बातें सुनने के बाद पंडित जी के भी आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा – लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था – लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था।

पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी भक्ति, श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है।

तो सारे प्रेम से बोलो

जय भोलनाथ की
जय-जय शिव शम्भू
हर-हर महादेव

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1 thought on “केदारनाथ को क्यों कहते हैं “जागृत महादेव” आइये जाने..”

  1. जय भोले शिव शंभू ओम नमः शिवाय कहानी बहुत अच्छी लगी केदारनाथ धाम के बारे में ऐसी कहानी आज तक नहीं सुनी थी बहुत अच्छा लगा पढ़कर जय भोले

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