कृषि कानूनों का विरोध करते हुए किसानों को बीते 50 दिन, जानिए अब तक क्या क्या हुआ

कृषि कानूनों का विरोध
कृषि कानून

कृषि कानूनों का विरोध: आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कृषि कानूनों को अपने उद्देश्य के लिए देश के सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी गठित की थी, उसके एक सदस्य ने खुद को कमेटी से अलग कर लिया है, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मान के नाम को लेकर काफी चर्चा हुई थी कि यह कानून को मानने वाले हैं। इस संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी को महत्व नहीं देना चाहता है।

वर्तमान में कमेटी के सदस्यों को लेकर काफी आलोचना हो रही है, इतना ही नहीं उनकी आलोचना के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की भी हो रही है आज कृषि कानूनों का विरोध करते हुए किसानों को 51 दिन हो चुके हैं, बताते चलें कि किसान मोर्चा का एक ब्लॉग दिया। जिस पर किसानों की सूची, जिनकी कृषि कानूनों के विरोध में मौत हो चुकी है|

संयुक्त किसान मोर्चा ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मरने वाले किसानों को शहीद का दर्जा दिया है, आपकी जानकारी के लिए बता देंगे। इस ब्लॉग को अनुरूप संधु, सजनीत मंगत और हरेंद्र हैप्पी चला रहे हैं, इस ब्लॉक में विगत 24 नवंबर से 13 जनवरी तक किसानों की हुई मौतों का विवरण दिखाया गया है, इसके साथ ही इनसे जुड़ी प्रकाशित खबरों के लिंक भी दिए गए हैं, प्रदर्शन के 50 दिन पूरे हो जाने पर आंदोलन में शामिल मरने वाले किसानों की संख्या 121 तक पहुंच चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई थी, उसमें सम्मिलित भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मान ने गुरुवार को पत्र लिखकर कहा कि जिस तरह से किसान संगठनों और पब्लिक में संदेह की स्थिति पैदा हुई है उसको देखते हुए मैं कोई भी त्याग देने के लिए तैयार हूं, वैसे देखा जाए तो भूपेंद्र सिंह मान के इस कदम की सराहना की जानी चाहिए, संयुक्त किसान मोर्चा ने भूपेंद्र सिंह मान के इस्तीफे को अपनी जीत का छोटा रूप बताया है।

कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों की शहादत

प्रदर्शन के दौरान मारने वाले 121 शहीदों की यह सिर्फ संख्या नहीं है, बता दें कि हर मौत के पीछे एक लंबी दास्तान है, जैसा कि आप सरदार सुरेंद्र सिंह सिद्धू जी के बारे में नहीं जानते होंगे, सरदार सुरेंद्र सिंह के बारे में देश के राज्य मध्य प्रदेश की पूरी भाजपा जानती होगी, इतना ही नहीं ग्वालियर संभाग का हर नेता और मंत्री भी उनसे बाकी होगा, उनका भी नाम 121 शहीदों में शामिल है और जिनके बारे में हम आपको बताना चाहते हैं। वह आजीवन भाजपा के लिए काम करने वाले सुरेंद्र सिंह ने कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोला।

उन्होंने ग्वालियर में कृषि कानूनों के विरुद्ध प्रशासन को ज्ञापन दिया और विगत 2 दिसंबर को ग्वालियर से किसानों का जत्था लेकर निकले थे। इस जत्थे में करीब 25 लोग शामिल थे, जिसमें 50 से 60 ट्रालियां, 100 से अधिक गाड़ियां भी थी, ग्वालियर से करीब 260 किलोमीटर की यात्रा कर उन्होंने पल भर में मोर्चा बनाया था कृषि कानून के विरोध में। आंदोलन के चलते विगत 3 जनवरी को सुरेंद्र सिंह जी का अचानक निधन हो गया, 13 जनवरी कौन की अंतिम अरदास थी।

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