समोसा भारतीय फूड नहीं है , जलेबी और दाल-चावल है या नहीं ??

यदि आप से कोई कहे समोसा भारतीय फूड नहीं है अवश्य ही आप स्तब्ध रह जाएंगे और आपके मन में एक लालसा , एक उत्सुकता बन जाएगी यह जानने की कि जो समोसा हमारे जीवन कि रोजमर्रा जिंदगी का हिस्सा है वह एक भारतीय व्यंजन नहीं है तो फिर किस देश ने समोसा हमें दिया है , आज हम आपको इस पोस्ट में इसी प्रकार की जानकारी देंगे और बताएंगे कि समोसा भारत को किस देश ने कब दिया , सिर्फ समोसा ही नहीं जलेबी और दाल चावल?? आपको क्या लगता है भारतीय है या नहीं ?? सच पूछो तो जवाब यही मन में आएगा की जलेबी और दाल चावल तो भारतीय ही है लेकिन नहीं ऐसा नहीं है।

13वीं और 14वीं शताब्दी में समोसा भारत में मध्य पूर्व के व्यापारियों द्वारा लाया गया

समोसा , नाम सुनते ही अधिकांश लोगों का खाने का मन करने लग जाता है क्योंकि यह व्यंजन है ही ऐसा , खैर मजे की बात तो यह है की 13वीं शताब्दी में भारत में आया यह समोसा आज तक उतना ही प्रचलित है और इसके बनाने का ढंग भी वहीं पड़ा है बदला नहीं।

विदेश से व्यापारियों द्वारा लाया गया है समोसा भारतीय लोगों से कुछ इस तरह अपना रिश्ता बना चुका है कि अब यह बात कोई स्वीकार नहीं करता कि समोसा भारतीय फूड नहीं है , हम सब इसे भारतीय ही मानते हैं।

भारत को विविधताओं का देश को मना ही जाता है उसी प्रकार से समोसे को बनाने की विधि भी भारत के हर क्षेत्र में अलग है , कुछ जगहों पर समोसे में सिर्फ आलू डाला जाता है और वही दक्षिण भारत का प्रसिद्ध समोसा “सब्जी वाला समोसा” माना जाता है।

और भारत की कुछ जगह जहां नॉनवेज भोजन प्रयोग में लिया जाता है वहां पर इस समोसे में आलू या सब्जी की जगह मीट का प्रयोग कर दिया जाता है उदाहरण के तौर पर हैदराबाद में प्रचलित समोसा “मीट वाला समोसा” है।

जलेबी आई ईरान से और दाल-चावल है नेपाल की देन

जलेबी नाम सुनकर खाने का मन तो आपका पक्का करने लग गया होगा लेकिन रुको भैया इतनी उत्सुकता मत दिखाओ खाते तो आप आए ही हो जलेबी हमेशा से लेकिन आपने कभी भी सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि जो जलेबी आप खा रहे हो वह भारत की देन नहीं है।

जलेबी को अरबी भाषा में “ज़ालाबिया” और फारसी भाषा में “ज़ालिबिया” कहा जाता है लेकिन अपने भारत में इसे मुख्य रूप से जलेबी के नाम से ही जाना जाता है।

इतिहास की माने तो जलेबी का प्रचलन भी मध्य पूर्व से हुआ था जिसे फारसी आक्रमणकारियों द्वारा भारत तक पहुंचाया गया , लेकिन भैया यह तो भारत है एक बार जो स्वादिष्ट चीज आ गई उस पर हम अपना अधिकार जता लेते हैं और ठीक ऐसा ही हुआ कि अब आम लोग जलेबी को भारतीय भोजन ही समझते हैं।

पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक का भारत एक सम्मान नहीं है तो जनाब जलेबी पूरे भारत में एक सम्मान कैसे रह सकती है? उत्तरी भारत में पतली जलेबी खाने के शौकीन लोग हैं तो वही दक्षिण भारत में लोग मोटी जलेबी को पसंद करते हैं।

अब यदि कोई आपसे कहे कि दाल चावल भारत का व्यंजन नहीं है यह नेपाल से आया है तो आप अवश्य ही उसे कहेंगे कि भैया तेरी मति भ्रष्ट हो चुकी है लेकिन यकीन मानिए दाल चावल का मिलाकर खाना नेपाल ने ही हमें सिखाया है।

दाल चावल को कुछ क्षेत्रों में दाल भात के नाम से भी जाना जाता है और यह सबसे सरल भारतीय डिश है ,,, अरे रुको रुको भैया भारतीय डिश सिर्फ कहने को है लेकिन यह एक नेपाली डिस है।

आलू , अधिकांश परिवारों में प्रतिदिन किसी ना किसी रूप में खाया जाता है , चौंकना मत यह भी भारतीय नहीं है

आलू यह एक ऐसा व्यंजन है शायद भारत के अधिकांश परिवार बिना इसके अपनी रसोई की कल्पना करना भी सही नहीं समझेंगे तो फिर लोग यह भी नहीं मानेंगे कि आलू भारतीय नहीं है। हमारे मानने ना मानने से क्या होता है?? अब सच्चाई तो जो है वही रहेगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें आलू पेरू और बोलीविया की देन है और वही से निकलकर इसमें अपनी धाक पूरी दुनिया में जमा रखी है और कुछ देशों में तो आलू एक प्रधान फसल बन चुकी है।

प्रयोग करके देखना अपने घर पर मम्मी , दादी या अपनी पत्नी को कहना कि जो आलू आपकी रसोई में पड़ा है वह एक भारतीय व्यंजन नहीं है तो फटाक से उनका जवाब आएगा ऐसा तो संभव ही नहीं है , दादी जी कहेंगी जब से मैंने समझ पकड़ी है मैंने आलू को अपनी रसोई में पाया है तो फिर मैं कैसे मान लूं कि यह भारतीय नहीं है ,, खैर उनकी बात भी सही है लेकिन अब सच्चाई तो सच्चाई ही रहेगी कि आलू एक विदेशी फसल है।

हमने आईएनडीन्यूज़ टीवी द्वारा जाना है कि समोसा भारतीय फूड नहीं है , जलेबी और दाल चावल भी भारत की देन नहीं है , एवं हमारा डेली यूज़ वाला आलू भी विदेशी है , इसी तरह हमारे दिन की शुरुआत करने वाली चाय भारतीय है या नहीं?? आप नीचे कमेंट करके बता सकते हैं और यदि आप जानना चाहते हैं तो जुड़े रहिए हमारे साथ हमारी अगली पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि जिस चाय की चुस्कियों के साथ हम अपना दिन शुरू करते हैं वह भारतीय है या विदेशी।

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