Union Budget 2020 Highlights , Top Hindi Headlines , धाराओं के हिसाब से बजट 2020 का विश्लेषण

आज हम आपको यहां पर सरल भाषा में Union Budget 2020 Highlights , Top Budget Hindi Headlines , धाराओं के हिसाब से बजट 2020 का विश्लेषण समझाने की कोशिश करेंगे, देश के जाने माने चार्टेड अकाउंटेंट से प्राप्त की गयी जानकारी।

पूरे विस्तार से देखें यहां पर कि एक आम आदमी के लिए निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया यह आम बजट 2020 “बोझ बना है या सहारा ”

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धाराओं के हिसाब से आम बजट 2020 का विश्लेषण , Union Budget 2020 Highlights

धारा 50C, 43CA, व 56 के लिए जहां प्रोपेर्टी के ट्रांसफर में प्रतिफल की बजाय डीएलसी ली जाती है वहां डीएलसी व वास्तविक प्रतिफल में 5% के अंतर तक कोई addition नहीं होता था। अब उसको बढ़ाकर 10% कर दिया गया है।

कैपिटल गेन की गणना करते समय अगर प्रॉपर्टी 1.4.2001 से पहले की अक्वायर्ड है तो उस प्रॉपर्टी की फेयर मार्किट वैल्यू या खरीद कीमत जो भी करदाता की इच्छा हो वो ली जाती है। अब धारा 55 में संशोधन किया जा रहा है कि फेयर मार्किट वैल्यू डीएलसी से ज्यादा नहीं हो सकती। अगर डीएलसी डिक्लेरेड है तो।

टैक्स ऑडिट कराने की लिमिट धारा 44एबी में 5 करोड़ होगी बशर्ते कि टर्नओवर में कैश का पोर्शन 5% से कम हो तथा खरीद व खर्चे भी नकद में 5% से ज्यादा न हों।

धारा 80EEA का डिडक्शन 1 साल के लिए एक्सटेंड कर दिया गया। जो फ्लैट खरीदने पर पिछली बार एक साल के लिए दिया था।

धारा 285बीबी जोड़ी गई है। जिसमें करदाता के एकाउंट में AIR डिपार्टमेंट भी इन्फॉर्मेशन अपलोड कर सकेगा।

धारा 274 में संशोधन करके पेनल्टी इम्पोज़ करने की प्रक्रिया को भी फेसलैस किया जाएगा।

धारा 271K पेनल्टी की नई जोड़ी है। यूनिवर्सिटी साइंटिफिक रिसर्च संस्थाएं जिनको धारा 80 जी या 35 के डोनेशन के लिए दानदाताओं की डिटेल अपलोड करनी है। जिससे दानदाताओं को itr फ़ाइल करते समय 80 जी या 35 का बेनिफिट परिफिल आ जाए। अगर अपलोड करने का उल्लंघन होगा तो 10 हजार से 1 लाख की पेनल्टी लगेगी।

पेनल्टी धारा 271AAD:- अगर करदाता की बुक्स में false एंट्री पाई जाती है या टैक्स evade करने के लिए किसी एंट्री का ओमिशन किया जाता है तो उस एंट्री के बराबर की पेनल्टी लगेगी।

धारा 254 में संशोधन किया है कि ट्रिब्यूनल तभी स्टे ग्रांट करेगा जब करदाता द्वारा डिमांड का 20% मिनिमम जमा कर दिया गया हो।

धारा 253(1)(c) में संशोधन करके धारा 12AA के बाद 12AB भी जोड़ा गया है ताकि धारा 12AB का आर्डर भी ट्रिब्यूनल में अपिलेबल आर्डर हो जाए।

धारा 250(6A) के बाद में 6B, 6C, 6D जोड़ी गई हैं। जिससे कमिश्नर अपील्स की अपील भी जुरिसडिक्शन फ्री हो जाएंगी। स्क्रूटनी की तरह फेसलैस।

धारा 234G जोड़ी गई है। जिसमें धारा 35 व 80G वाली संस्थाएं दानदाताओं की रिटर्न फ़ाइल करने में देरी करेंगी तो प्रतिदिन 200 रुपये के हिसाब से फीस लगेगी।

टीसीएस की धारा 206C की सब-सेक्शन 1F के बाद में 1G व 1H जोड़कर टीसीएस का बेस बढ़ाया गया है Union Budget 2020 में

1G में authorised डीलर से एक वित्तिय वर्ष में एग्रिगेट 7 लाख रूपए या ज्यादा आउट ऑफ इंडिया भेजने के लिए या टूर प्रोग्राम खरीदता है तो 5% टीसीएस कलेक्ट करेगा। ये फॉरेन टूर वालों पर गाज गिरा दी है।

1H में प्रावधान किया है कि कोई 10 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाला(चाहे कोई भी हो) अगर कोई गुड्स पूरे साल में एग्रिगेट 50 लाख से ज्यादा का बेचता है तो 0.1% टीसीएस कलेक्ट करेगा। बशर्ते कि कहीं टीडीएस न कटा हो।

आसान भाषा में समझे तो पूरा होलसेल व्यापार टीसीएस में कवर हो गया है। धारा 203AA को डिलीट कर दिया गया है।

टीडीएस के प्रावधानों में नई धारा 194ओ जोड़ी गई है। जिसमें ऑनलाइन बिक्री को भी टीडीएस के दायरे में ले लिया।

ई-कॉमर्स ऑपरेटर जैसे अमेजोन या फ्लिपकार्ट वाले जब वास्तविक सप्लायर ऑफ सर्विसेज या गुड्स को भुगतान करेंगे या क्रेडिट करेंगे जिसे e कॉमर्स पार्टिसिपेंट्स कहा 1% टीडीएस काटेंगे। पैन नहीं दिया तो 5% कटेगा। पहले 20% था अब 5% कर दिया है धारा 206AA में संशोधन करेगा।

अगर ई-कॉमर्स पार्टिसिपेंट ने पूरे साल में 5 लाख से कम का गुड्स या सर्विसेज सप्लाई की हैं तथा पैन या आधार दे दिया है तो टीडीएस नहीं कटेगा।

Top 5 Headlines of Union Budget 2020

  1. नई धारा 194K जोड़कर म्यूच्यूअल फंड्स की इनकम अगर 5000 रुपये से ज्यादा होगी तो 10% टीडीएस काटना पड़ेगा।
  2. धारा 194A, 194C, 194H, 194I आदि धाराओं में धारा 44AB वाले इंडिविजुअल व एचयूएफ को टीडीएस काटना पड़ता था। अब इनमें धारा 44AB की बजाय बुजीनेस के मामले में 1 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाले इंडिविजुअल व एचयूएफ व प्रोफेशन के मामले में 50 लाख से ज्यादा रिसिप्ट्स वाले इंडिविजुअल व एचयूएफ इन धाराओं में टीडीएस काटने के लिए लिअबल होंगे।
  3. धारा 194 में संशोधन करके डिविडेंड पर टीडीएस की रेट 10% कर दी व लिमिट 5000 रुपये कर दी।
  4. धारा 192 में सब सेक्शन 1C जोड़कर धारा 80IAC में छूट लेने वाले स्टार्ट अप द्वारा अपने एम्प्लोयी को दिए गए इसोप पर टीडीएस काटने के प्रावधान बताए हैं:- या तो रेलेवेंट असेसमेंट ईयर के 48 महीने बाद या specified सिक्योरिटी या स्वेट इक्विटी बेचने या एम्प्लोयी के नॉकरी छोड़ने के 14 दिन के भीतर टीडीएस जमा कराना पड़ेगा।
    धारा 156 व 191 में भी ऐसे ही संशोधन हैं।
  5. धारा 139(1) के एक्सप्लेनेशन 2 के क्लॉज़ a(iii) से वर्किंग शब्द डिलीट किया है जिससे वर्किंग पार्टनर की जगह सिर्फ पार्टनर रह गया। अतः अब फर्म की due डेट का बेनिफिट सभी पार्टनर को मिलेगा चाहे वो वर्किंग पार्टनर न हों।

आम बजट 2020 में धारा 139 (1) के एक्सप्लेनेशन 2 के क्लॉज़ b में 31 ऑक्टूबर था उसको 30 सितम्बर किया है।

Union Budget 2020 में धारा 6 , 10 , 140 व 143 का विश्लेषण

धारा 140 में संशोधन करके कम्पनी व एलएलपी के मामले में जव unavoidable reasons की वजह से any डायरेक्टर व any पार्टनर की बजाय कोई अन्य व्यक्ति इस उद्देश्य के लिए प्रेसक्राइब्ड हो वो रिटर्न sign कर सकता है। इसके लिए 140 के क्लॉज़ i(c) व ii(cd) में संशोधन करके ” or any other person, as may be prescribed for this purpose” replace किया गया है any डायरेक्टर व any पार्टनर के स्थान पर।

फेसलैस स्क्रूटिनी की धारा 143(3A) में धारा 143(3) के साथ 144 भी जोड़ दी गई।
143(3B) में 31 मार्च 2020 की जगह 31 मार्च 2022 किया है।

धारा 6 में संशोधन करके 182 दिन की बजाय 120 दिन किए हैं।

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धारा 10(23C) (iv), (v), (vi), (via) जो एक करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली ट्रस्ट, फण्ड, इंस्टिट्यूट, यूनिवर्सिटी, शिक्षण संस्थान, हॉस्पिटल, या मेडिकल इंस्टिट्यूट पर लागू होते हैं। इनके रजिस्ट्रेशन में आमूल चूल परिवर्तन किया है:-

इस धारा 10 के प्रथम व द्वितीय प्रोविसो को डिलीट करके नए प्रोविसो जोड़े हैं जो इस प्रकार हैं

i- पुराने सेकंड प्रोविसो में जो भी पहले से रजिस्टर्ड हैं उनको इस नए प्रोविसो के लागू होने के तीन महीने के भीतर फ्रेश अप्परूवल के लिए अप्लाई करना है। ये प्रोविसो 1 जून से लागू हो रहा है। नया रजिस्ट्रेशन 5 वर्ष के लिए दिया जाएगा।

ii- अगर किसी संस्था को अप्रूवाल समाप्त हो रही है तो समाप्त होने से छः माह पूर्व दुबारा अप्लाई करना है। नया रजिस्ट्रेशन 5 वर्ष के लिए दिया जाएगा।

iii- अगर संस्था को प्रोविजनली अपरूव किया है तो प्रोविजन अपरूवल समाप्त होने से छः माह पूर्व या एक्टिविटी शुरू होने के छः माह के भीतर अप्लाई करना होगा। नया रजिस्ट्रेशन 5 वर्ष के लिए दिया जाएगा।

iv- अन्य मामलों में एक माह पहले अप्लाई करना होगा। और उसको पहले प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन 3 वर्ष के लिए दिया जाएगा।

Top 7 Hindi Headlines Union Budget 2020

  1. इसी लाइन पर धारा 12ए, 12AA में संशोधन किए गए हैं एवं नई धारा 12AB जोड़ी है। i- पुराने सभी रजिस्टर्ड ट्रस्ट को नई धारा लागू होने के तीन महीने के भीतर अप्लाई करना होगा। तो धारा 12AB में 5 वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन होगा
    ii- नए ट्रस्ट का तीन साल के लिए प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन होगा।
    iii बाकी का 5 वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन होगा।
  2. सैलरीड एम्प्लोयी के प्रोविडेंट फण्ड, 80सीसीडी में योगदान, अप्रूव्ड सुपरअनुअशन इन तीनों में मिलाकर एम्प्लायर का कंट्रीब्यूशन 7 लाख 50 हजार से ज्यादा होगा तो टैक्सबल होगा धारा 17(2)(vii) में।
  3. डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स समाप्त करके डिविडेंड को धारा 56/ 57 में टैक्सेबल कर दिया।
  4. धारा 80G(v) की अप्रूवल भी 12 ए व 10(23C) की तर्ज पर दुबारा करानी होगी जो 5 वर्ष के लिए होगी। पहली बार में 3 वर्ष के लिए प्रोविजनली अप्रूवल मिलेगी।
  5. 80GGA में कैश की लिमिट 10 हजार से हटाकर 2 हजार कर दी है।
  6. धारा 80M जोड़कर inter कॉर्पोरेट डिविडेंड को टैक्स फ्री किया है।
  7. नई धारा 115BAC जोड़ी है। जिसमें कर की नई दर दी गई हैं। यह ऑप्शनल है। फिर बहुत सारी छूट छोड़नी होंगी।

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उम्मीद है देश के प्रमुख चार्टेड अकाउंटेंट के आसान भाषा में किए गए Union Budget 2020 Highlights , Top Hindi Headlines , धाराओं के हिसाब से बजट 2020 का विश्लेषण आप समझ गए होंगे , यदि फिर भी आपकी कोई समस्या है या फिर आप कुछ और जानना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

2 thoughts on “Union Budget 2020 Highlights , Top Hindi Headlines , धाराओं के हिसाब से बजट 2020 का विश्लेषण”

  1. जब बजट में 80Gसमाप्र हो गया तो 80 G v का क्या उपयोगिता है?
    12aa का क्या उपयोगिता है?

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